मध्यप्रदेश का भौगोलिक विभाजन | mp bhogolik vibhajan

 मध्यप्रदेश भारत के प्रायद्वीपीय पठार का ही एक भाग है। यहाँ पठारी भाग अधिक है। कहीं-कहीं पर्वतीय श्रृंखलाएँ विस्तृत हैं। और कुछ क्षेत्रों में मैदानी भाग फैले हैं। भौतिक बनावट की दृष्टि से वर्तमान मध्यप्रदेश को निम्नलिखित भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है।


1. मध्य उच्च प्रदेश


2. सतपुड़ा श्रेणी प्रदेश


3. पूर्वी पठार


1. मध्य उच्च प्रदेश मध्य उच्च प्रदेश राज्य के दो-तिहाई से भी अधिक क्षेत्र पर विस्तृत है। इसके अंतर्गत मध्य भारत का पठार, बुंदेलखण्ड उच्च प्रदेश, रीवा- पन्ना का पठार या विन्ध्यन कगारी प्रदेश, मालवा का पठार और नर्मदा घाटी, आदि क्षेत्र सम्मिलित है। इस प्रदेश की विशालता एवं विविधता को ध्यान में रखकर इस प्रदेश को 5 उप विभागों में विभाजित किया है


1. मध्य भारत का पठार, 2. बुंदेलखण्ड प्रदेश, 3. विन्ध्यन कगार प्रदेश, 4. मालवा का पठार, 5. नर्मदा घाटी




             मध्यभारत का पठार


स्थिति  मध्यभारत का मध्यप्रदेश के उत्तर पश्चिम में 24°00 'से 26°48 से उत्तरी अक्षांश तथा 74°50 से 79°10, पूर्वी देशान्तर में अवस्थित है


क्षेत्रफल  मध्यभारत का पठार मध्यप्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 10.7% है। 


निर्माण इस पठार का निर्माण मुख्यतः विन्ध्य शैल समूह के अपरदन तथा नदियों के निक्षेपों से हुआ है।


सम्बंधित प्रमुख जिले - नीमच, श्योपुर, मुरैना, भिड, ग्वालियर, शिवपुरी • जलवायु विषम जलवायु (ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक गर्म, शीत ऋतु में अत्यधिक ठण्ड ) पायी जाती है।


वर्षा- इस क्षेत्र में औसत वर्षा लगभग 50-75 सेमी के आसपास होती है अर्थात यह अल्प वर्षा वाला क्षेत्र है। 


वन शुष्क कटीले पर्णपाती वन पाए जाते हैं जैसे खैर, बबूल, पलाश आदि पाये जाते


हैं।


मिट्टी जलोढ़ व कछारी मृदा पाई जाती है।


फसल प्रमुख फसले सरसों, ज्वार, तिल, गेहूँ आदि हैं। नदियाँ प्रमुख नदियाँ चम्बल, सिंध, कालीसिप, पार्वती, क्वॉरी, सीप आदि है।


विशेष मध्यभारत के पठार को सरसों की बड़ी कहा जाता है।



इस क्षेत्र के अंतर्गत मुरैना जिले की अम्बाह, मुरैना, जौरा, कैलारस, पोरसा, सबलगढ़, तहसीलें श्योपुर जिले की विजयपर कलां, करहल और श्योपुर कलां तहसीलें, भिण्ड जिले की भिण्ड, मेहगांव व गोहद तहसीलें, ग्वालियर जिले की ग्वालियर तहसील, शिवपुरी जिले की शिवपुरी, पोहरी, कोलरस तहसीलें, गुना जिले की गुना व चाचौड़ा तहसीलें, नीमच जिले की जावद, नीमच और मनासा और मंदसौर जिले की भानपुरा तहसीलें सम्मिलित हैं।


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बुंदेलखण्ड का पठार


 स्थिति मध्य भारत के पूर्व में तथा रीवा पन्ना के पठार के उत्तर पश्चिम में स्थित है। इसका विस्तार 24°06 से 26°22, उत्तरी अक्षांश तथा 77°51' से 80°20 पूर्वी देशान्तर के मध्य है।


क्षेत्रफल बुदेलखण्ड का पठार मध्यप्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 7.7% है।


सम्बंधित प्रमुख जिले दतिया, सागर, अशोक नगर, टीकमगढ़, निवाडी, छतरपुर, पन्ना


जलवायु ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्म तथा शीत ऋतु में अधिक ठंडी 


वर्षा औसत वर्षा लगभग 75-100 सेमी.


वन तेंदूपता, महुआ, बबूल, सौर नीम आदि पाये जाते हैं।


मिट्टी मिश्रित (लाल-काली) मिट्टी पाई जाती है।


फसल प्रमुख फसलें गेहूं, ज्वार व तिल आदि ।


नदियाँ- प्रमुख नदियाँ बेतवा, सिंध, धसान, उर्मिल, जामनी आदि


खनिज प्रमुख खनिज हीरा, चूना पत्थर आदि ।


विशेष- बुंदेलखंड की सबसे ऊँची चोटी सिद्ध बाबा की चोटी (1172 मी.) दतिया में स्थित है। बुंदेलखंड की गंगा बेतवा नदी को कहा जाता है।


बुंदेलखण्ड प्रदेश मुख्यतः पूर्व कैम्ब्रियन युग की रवेदार तथा ज्वालामुखी परतदार शैलों से निर्मित है। इन्हें बुंदेलखण्ड ग्रेनाइट महरोनी वर्ग के अवशे, बिजावर सीरीज और विन्ध्यन शैल समूह कहा जाता है। इस प्रदेश में सिंध तथा उसकी सहायक नदी पहूज, बेतवा


और उसकी सहायक नदी धसान और केन प्रवाहित होती हैं।



              रीवा- पन्ना का पठार


स्थिति- रीवा पन्ना का पठार बुंदेलखण्ड के पठार के दक्षिण-पूर्व में, बघेलखण्ड के पश्चिम में स्थित है। इसका विस्तार 23°10' से 25°12' उत्तरी अक्षांश तक तथा 78°4' से 82°18' पूर्वी देशान्तर तक है।


क्षेत्रफल - रीवा-पन्ना के पठार मध्यप्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 10.36 प्रतिशत है।


निर्माण - रीवा - पन्ना के पठार का निर्माण, विंध्य शैल समूह के अपरदन से हुआ है।


सम्बंधित प्रमुख जिले रीवा, पन्ना, कटनी, उमरिया, सतना, दमोह


जलवायु - ग्रीष्म ऋतु में साधारण गर्म तथा शीत ऋतु में अधिक ठण्डी होती है।


वन- इस क्षेत्र के वनों में बाँस, तेंदूपत्ता, शीशम, खैर आदि पाये जाते है। 


मिट्टी मिश्रित मिट्टी पायी जाती है।


नदियाँ टॉस, केन, बीहड़, महाना, बिछिया आदि है।


फसल गेहूँ, चावल, तिल


खनिज - चूना पत्थर, गेरू व हीरा




मालवा का पठार


स्थिति मालवा का पठार मध्यप्रदेश के पश्चिम भाग में स्थित है, इसका विस्तार 20°17 से 25°8 उत्तरी अक्षांश तक तथा 74°20 से 79°20' पूर्वी देशान्तर तक है।


क्षेत्रफल मध्यप्रदेश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 28 प्रतिशत भाग पर विस्तृत है।


निर्माण दक्कन ट्रेप की लावा तथा बेसाल्ट चट्टानों के टूटने से हुआ है।


सम्बंधित प्रमुख जिले- इंदौर, उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, सालाम, धार, झाबुआ 


जलवायु समशीतोष्ण जलवायु (ग्रीष्म ऋतु में साधारण गर्म, शीत ऋतु में साधारण ठण्ड पाई जाती है।


वर्षा- इस क्षेत्र में 50-75 सेमी. वर्षा होती है।


वन शुष्क पर्णपाती वन ( बबूल, पलाश, तेंदूपत्ता आदि ) मिट्टी काली मिट्टी पाई जाती है।


फसल सोयाबीन, कपास, गेहूँ, ज्वार तथा मूँगफली प्रमुख हैं।


नदियाँ - चम्बल, क्षिपा, पार्वती, गंभीर, खान, माही आदि हैं।


विशेष कर्क रेखा मालवा के मध्य से गुजरती है।


मालवा के पठार की सबसे ऊंची चोटी सिगार पोटी (881 मीटर) व अन्य चोटी जानापाव (854 मीटर), धजारी (810 मीटर) यह तीनों इंदौर जिले में स्थित हैं।


इस प्रदेश के उत्तर में मध्य भारत का पठार व दक्षिण पूर्व राजस्थान, उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश का बुंदेलखण्ड प्रदेश, पूर्व में विन्ध्यन कगार प्रदेश दक्षिण में नर्मदा घाटी और पश्चिम में गुजरात राज्य स्थित है।



नर्मदा घाटी


स्थिति- मालवा तथा रीवा-पन्ना के पठार के दक्षिण में तथा सतपुड़ा श्रेणी के उत्तर में अवस्थित है।


इसका विस्तार 22°30' से 23° 45' उत्तरी अक्षांश तथा 74 से 81*30' पूर्वी देशान्तर तक है।


क्षेत्रफल राज्य के कुल क्षेत्रफल का 26 प्रतिशत है।


निर्माण- इस घाटी का निर्माण पश्चिम में दक्कन ट्रैप की चट्टानों से तथा पूर्व में धारवाड़ तथा विध्य क्रम की चट्टानों से हुआ है।


सम्बंधित प्रमुख जिले जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, सीहोर, रायसेन


जलवायु ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्म व शीत ऋतु में साधारण ठण्ड (इसका पूर्वी क्षेत्र अधिक ठंडा व पश्चिमी क्षेत्र - अधिक गर्म होता है)


वर्षा- इस क्षेत्र में वर्षा की मात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर जाने पर क्रमशः बढ़ती जाती हैं। इस क्षेत्र की औसत वर्षा 75-125 सेमि. है


'नदियाँ नर्मदा, तवा, हिरण, शेर, हथिनी, शक्कर, दूधी इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ हैं।


वन- सागौन, साल, तेंदूपता, बाँस आदि । 


मिट्टी- नर्मदा घाटी के पश्चिम में गहरी काली मिट्टी तथा पूर्वी क्षेत्र में लाल मिट्टी पाई जाती है।


फसल- इसके पश्चिम में कपास व मूंगफली, मध्य क्षेत्र में गेहूँ एवं पूर्वी क्षेत्र में चावल का उत्पादन होता है। 


खनिज चूना पत्थर, संगमरमर, चीनी, मिट्टी आदि ।


विशेष - नर्मदा घाटी क्षेत्र को कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। यह म.प्र. का सबसे निचला प्राकृतिक विभाग है ।




सतपुड़ा श्रेणी प्रदेश


मध्यप्रदेश के दक्षिण में पूर्व से पश्चिम तक सतपुड़ा श्रेणी प्रदेश एक त्रिभुजाकार क्षेत्र के रूप में विस्तृत है। यह प्रदेश मण्डला, डिण्डोरी, बालाघाट सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल, हरदा, खण्डवा, खरगौन, बड़वानी जिलों में विस्तृत है। इस प्रदेश का भौगोलिक विस्तार 21° उत्तरी अक्षांश से 23° उत्तरी अक्षांश व 74°30' पूर्वी देशांतर से 81° पूर्वी देशांतरों तक है। इस प्रदेश के उत्तर पूर्व में बघेलखण्ड का पठार और दक्षिण में महाराष्ट्र राज्य स्थित है।


इस प्रदेश की औसत ऊँचाई 400 से 600 मीटर है। बैतूल पठार 400 से 600 मीटर ऊँचा है। इसकी कालीभीत पहाड़ियाँ 678 मीटर ऊँची हैं। बड़वानी पहाड़ियाँ 641 मीटर, खण्डवा में बिजलगढ़ पहाड़ियाँ 849 मीटर, कालीभीत 770 मीटर, बैतूल तहसील में, महादेव पहाड़ियों में स्थित धूपगढ़ शिखर सतपुड़ा व मध्यप्रदेश राज्य का सर्वोच्च पर्वत शिखर है।


सतपुड़ा प्रदेश में नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी अपवाह तंत्र की नदियाँ प्रवाहित होती हैं जिनमें वेनगंगा, गार, शक्कर, छोटी तवा और वर्धा प्रमुख हैं।




पूर्वी पठार


मध्यप्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में बघेलखण्ड का पठार (पूर्वी पठार) विस्तृत है। यह सीधी, कटनी, उमरिया और शहडोल जिलों में विस्तृत है। भौगोलिक विस्तार की दृष्टि से यह 23°40' उत्तरी अक्षांश से 24° 45' उत्तरी अक्षांश तथा 80°5' पूर्वी देशांतर से 82°35' पूर्वी देशांतरों तक विस्तृत है। इसके उत्तर में उत्तरप्रदेश, उत्तर-पश्चिम में विन्ध्यन कगार प्रदेश, पूर्वी में छत्तीसगढ़ राज्य का बघेलखण्ड प्रदेश, दक्षिण में सतपुड़ा श्रेणी प्रदेश पश्चिम में नर्मदा घाटी प्रदेश विस्तृत है।


इस प्रदेश में सोन एवं उनकी सहायक नदियों में छोटी महानदी, जोहिला, गोपद, बनास, रिहन्द तथा कन्हार उल्लेखनीय हैं।



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